Wednesday, 1 January 2014

नूतन वर्ष - 2014





नया वर्ष हो मंगल मंगल गीत सुनाएँ|
भूल विगत को नए सृजन की राह दिखाएँ|

विह्स उठे मुरझाये चेहरे|
 भरे जख्म जो खाए गहरे|
बहुत हो गया खून खराबा|
बहुत हो गया काशी काबा|
घृणा बैर से दूर प्रेम का रस बरसाएं|
भूल विगत को नए सृजन की राह दिखाएँ|

पुनः चले विकास की आँधी|
 फिर से आये गौतम गांधी|
इश मोहम्मद साथ-साथ मिल,
नैय्या खेवें बनकर माझी|
नई डगर पथरीली राहें फिर भी कदम बढ़ाएं|
 भूल विगत को नए सृजन की राह दिखाएँ|

जनसंख्या विस्फोट न होवे|
अणुबम की अब चोट न होवे|
भूख प्यास से मरे न कोई|
आतंकी से डरे न कोई|
संसद अछरधाम खून से अब न नहाए|
भूल विगत को नए सृजन की राह दिखाएँ|

महलों को यह बात बताएं|
 झोपड़ियों को गये लगायें|
रात अँधेरी दिया जये पर
 सुख समृद्धि फैले घर-घर|
 दो हजार चौदह में चार बीन पर तान सुनाएँ|
भूल विगत को नए सृजन की राह दिखाएँ|

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