Saturday, 10 August 2013

हर समय वे....


हर समय वे दुलारे गए|
एक हम ही तो मारे गए|
हमको मझधार में भेजकर,
वे किनारे किनारे गए|
लव कहकर जब पुकारा उन्हें,

आँखों से करके इशारा गए|

प्यार का एक झोंका....



प्यार का एक झोंका दर्द जगा गया है|
मेरे आँखों में पड़ा पर्दा वो हटा गया है|
गुजरा हुआ वक्त अब याद आने लगा,
लम्हों में न होंगे हम वो जता गया है....


सच का आइना....


पल भर के लिए हंसा गया कोई |

ता-उम्र के लिए रुला गया कोई |

जिंदगी खाली सी है उसके बगैर,

सच का आइना दिखा गया कोई ||



मैं अकेला हूँ...


मैं अकेला हूँ... 
तनहा हूँ.... 

सावन के हसीन पल में भी 
वो याद आ रहा है,
कभी जो मेरा अपना था|
रातों का तेरे संग जागना 
और ख्यालो में भागना 
आँखों की नीद भी छीनी थी 
जीने का ख्वाब भी छीना था|
अब जिंदगी यूँ ढलती है,
जैसे मुट्ठी से रेत फिसलती है|
दूर होते हुए भी साथ होकर,
ख्यालों में पास और पास होकर
फिर तुम बदल गई अचानक
मेरी जिंदगी बदलकर|
आज भी तुम दिखती हो आँखों में,
परछाई सी रहती हो सांसों में|
बहुत अजीब जुर्म-ए-महब्बत की सजा पाई है,
फागुन में ऐ परीतू बहुत याद आई है|
तू बहुत याद आई है.... 
तू बहुत याद आई है....
मैं अकेला हूँ... 
तनहा हूँ....


एक तू आती नहीं ....

ऐ परी! 

एक तू आती नहीं 
आती है तो दबे पाँव आती है
दिल में मेरे हलचल मचती ह,
और उदास कर जाती है.....
मैं न तब था 
न अब हूँ...
और अब तो सवाल ही नही उठता 
निष्ठुर हवा के झोकों ने 
तिनका तिनका उडा दिया है
जीने को कोई पता न दिया है....
जानता हूँ,
बुनती हो, चुनती हो, पीती हो,
ख्यालों को....
लगता है पी रही हो प्यालो को....
मेरे स्वप्न मर न सके शायद 
एक तू आती नहीं ....


ऐ परी .....


ऐ परी !
तेरी चाह में मैं 
खुद से पिघलता हूँ रोज 
पर मुलाकात नही होती 
सामना रोज होता है 
पर बात नहीं होती 
बगिया की एक पंखुड़ी हो तुम 
तीखी सीधी सपाट
संवेदनाओं से ओतप्रोत 
जिंदगी मेरी यूँ जैसे अँधेरी रात
अब न तुम, न वो रात 
तुम हंसकर मुझ पर 
बिखेरती रही चांदनी 
जिसमे मैं डूबता रहा 
उबरता रहा भीगता रहा 
उलझ कर
ख्वाब के धरातल पर 
रेत का घरोंदा बनाकर 
नाम लव लिख दिया मुस्कुराकर 
यूँ लगा जैसे लव मेरे करीब है 
मेरे आँख पे पटी बंधी है,
तू है, दूर है फिर भी 
तू मेरे पीठ पीछे खड़ी है 
पीठ पे हाथ 
तेरे प्यार की मुहर है 
सच 
तू माने न माने 
लव ही मेरी नसीब है
फिर रोज की तरह मैं 
ऐ परी !
तेरी चाह में मैं 
खुद से पिघलता हूँ रोज .....


आह ! माय लव !...


आह ! 
माय लव !
देखो....

किताब के हर पन्ने में 
मेरा प्यार सो रहा है|
देखो....
चैन से मेरा यार सो रहा है 
देख उसे मैं मुस्कान भरता हू,
दुलारता हूँ
कौतुहल से निहारता हूँ|
उसके सौंदर्य का रसपान कर 
मैं आह भरता हूँ
माय लव ! 
मेरी धडकन की तरह 
मुझमे समाई है|
लव मेरी यादों की पूँजी है 
मेरे प्यार की कमाई है....
ज्यो ज्यों मेरी कलम चलती जाती है 
वो करीब और करीब आती जाती है|
आह ! 
माय लव !
तू मेरा यार है....
तू मेरा प्यार है....
तू मेरा जहां है.... 
जहां जहां मैंने नजर दौडाई है,
वहाँ वहाँ तू 
सिर्फ तू ही नजर आई है
तू ही नजर आई है.......
देखो....
किताब के हर पन्ने में 
मेरा प्यार सो रहा है|